सिद्धांत
आकाश
Akasha
आकाश पञ्च महाभूतों में प्रथम और सूक्ष्मतम है, जिसका गुण शब्द है। सांख्य और वेदान्त दोनों में यह अवकाश-प्रदाता तत्त्व है जिसमें शेष चारों भूत अवस्थित हैं, और तैत्तिरीय उपनिषद् में आत्मा से सर्वप्रथम आकाश की ही उत्पत्ति कही गई है। भा. २.५.२५ में यह तामस अहङ्कार के विकार से उत्पन्न बताया गया है, और इसका गुण शब्द 'द्रष्टृदृश्ययोः लिङ्गम्' अर्थात् द्रष्टा और दृश्य दोनों का चिह्न कहा गया है — यह असाधारण परिभाषा शब्द को केवल श्रवण-विषय न मानकर ज्ञान की सम्भावना का ही मूल बताती है।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 2.5.25 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=200167)