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वर्तमान शुभ समय

वर्तमान चौघड़िया: काल

समय: 08:48 PM से 10:26 PM तक। यह सामान्य समय है।

मुहूर्त चौघड़िया

मंत्र

ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

Om Hraum Joom Sah Om Bhur Bhuvah Svah Om Tryambakam Yajaamahe Sugandhim Pushtivardhanam. Urvaarukamiva Bandhanaan Mrityormuksheeya Maamritaat.

अर्थ एवं महत्व: पवित्र बीज ह्रौं, जूं, सः और महाव्याहृति सहित महामृत्युंजय मंत्र, जो शिव से मृत्यु से मुक्ति का आवाहन करता है।

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संबंधित देवता: Shiva

आने वाले त्योहार

पवित्र उत्सवों की प्रतीक्षा करें

आज सहित अगले तीन त्योहार — तिथि अनुसार।

सभी त्योहार
Nov 06

धनतेरस — धन की देवी की पूजा और कीमती धातु खरीदने का शुभ दिन।

Nov 08

प्रकाश का त्योहार — भगवान राम के अयोध्या लौटने पर दीप, मिठाई और आतिशबाजी से मनाया जाता है।

Nov 08

पूर्वी भारत में माँ काली की पूजा — भक्ति और बलि की रात्रि।

Nov02

आज का पवित्र अवलोकन

purnimant

सोमवार • 02-Nov-2026 • निकटतम गणना: नई दिल्ली

विक्रम संवत 2083

ब्रह्मांड की शांत लय

सोमवार परंपरागत रूप से शिव-पार्वती, शांति, संतुलन और करुणामयी शक्ति से जुड़ा है।

ॐ नमः शिवाय
Tithi • तिथि
अष्टमीKRISHNA
Nakshatra • नक्षत्र
आश्लेषाPada 1
Yoga • योग
शुभShubha
Karana • करण
कौलवKaulava
Masa • मास
मार्गशीर्षMargashirsha
02-Nov-2026 06:3702-Nov-2026 17:31
सूर्य अवधि
वर्तमान चौघड़ियाकाल02-Nov-2026 20:48 — 02-Nov-2026 22:26चौघड़िया — यह वह काल है जो अभी चल रहा है। यह मुहूर्तों से अलग है; चौघड़िया शुभ और अशुभ दोनों हो सकता है।

नई दिल्ली • Asia/Kolkata

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मुहूर्त

आज के शुभ और वर्ज्य काल

नई दिल्ली • 02-Nov-2026 • स्थान के अनुसार गणना

पूरा पंचांग
वर्ज्य

राहु काल

वर्ज्य

यमगण्ड

शुभ

अभिजित मुहूर्त

वर्ज्य

गुलिक काल

Shiva
आज के देवता

Shiva

शिव

शिव — हिन्दू त्रिमूर्ति के तृतीय महादेव हैं: संहार (लय) के अधिष्ठाता, कैलास-वासी महायोगी, जिनकी आराधना लिंग-रूप में सम्पूर्ण भारत में होती है; उमा-पार्वती इनकी शक्ति हैं। संसाधित पदों में (भा. १.२.२३) ये 'हर' नाम से आते हैं — हरि (स्थिति) और विरिञ्चि (सृष्टि) के साथ एक परम पुरुष द्वारा धारित लय-कार्य की संज्ञा। पाठ एक ही पुरुष के कार्यगत नाम बताता है — शिव का कृष्ण से व्यक्तिगत तादात्म्य नहीं; अतः यथावचन अंकित किया गया, कोई तादात्म्य-सम्बन्ध नहीं जोड़ा गया।

रोचक तथ्य

इन तथ्यों से जानें अपने आराध्य को और करीब से।

#1

एकादश रुद्राणियाँ — धी, वृत्ति, उशना, उमा, नियुत्, सर्पि, इला, अम्बिका, इरावती, सुधा, दीक्षा।

भा. ३.१२.१३ में इन्हें स्पष्ट रूप से रुद्र की स्त्रियाँ कहा गया है।

#2

लय-कार्य हेतु 'हर' संज्ञा

एक पुरुष के स्थिति-सृष्टि-लय धारण में लय की संज्ञा 'हर' है: 'स्थित्यादये हरिविरिञ्चिहरेति संज्ञाः' (भा. १.२.२३)।

#3

रुद्र को दिये गये दस स्थान — हृदय, इन्द्रियाँ, आकाश, वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी, सूर्य, चन्द्र और तप।

भा. ३.१२.११ में ब्रह्मा इन्हें पहले से बना हुआ बताते हैं।

#4

रुद्र के एकादश नाम — मन्यु, मनु, महिनस्, महान्, शिव, ऋतध्वज, उग्ररेता, भव, काल, वामदेव, धृतव्रत।

भा. ३.१२.१२। इनमें मनु और काल रुद्र के नाम हैं, स्वतन्त्र मनु या काल तत्त्व नहीं।

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नैमिषारण्य के ऋषिगण

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यदु-कुल के विनाश का समाचार क… स्वयं तीर्थ-स्वरूप भागवत धृतराष्ट्र-गृह का त्याग और त…
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शिव — हिन्दू त्रिमूर्ति के तृतीय महादेव हैं: संहार (लय) के अधिष्ठाता, कैलास-वासी महायोगी, जि…

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