स्वयं भगवान् को पुत्र रूप में पाने वाली
'वृतः प्राप्तोऽनसूयया' (भा. १.३.११)।
Anasuya
अनसूया — अत्रि-पत्नी, पातिव्रत्य की पराकाष्ठा के लिए प्रसिद्ध सती; परम्परा में इन्हीं की कोप-मुक्ति से त्रिमूर्ति-पुत्र (दत्तात्रेय, दुर्वासा, चन्द्र) का जन्म माना गया। भा. १.३.११: इन्होंने स्वयं भगवान् को पुत्र रूप में प्राप्त किया — 'वृतः प्राप्तोऽनसूयया'।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.3.11 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=369178)
'वृतः प्राप्तोऽनसूयया' (भा. १.३.११)।