भा. ३.६.६ में हिरण्मय पुरुष 'आण्डकोशे' — अण्ड के कोश में — जल में निवास करता हुआ बताया गया है: 'आण्डकोश उवासाप्सु सर्वसत्त्वोपबृंहितः'। यह समस्त सत्त्वों से उपबृंहित अवस्था है।
अण्डकोश
Andakosha
अन्य नाम Anda-kosha (the shell of the cosmic egg)
अण्डकोश — वस्तु, सृष्टि का कोश, जिसमें हिरण्मय पुरुष जल में निवास करता है। भा. ३.६.६ में: 'हिरण्मयः स पुरुषः सहस्रपरिवत्सरान् । आण्डकोश उवासाप्सु सर्वसत्त्वोपबृंहितः' — वह पुरुष हिरण्मय होकर सहस्र परिवत्सर तक जल में अण्डकोश में, समस्त सत्त्वों से उपबृंहित, रहा। भा. ३.६.७ में उसी को 'विश्वसृजां गर्भः' कहा गया है, जो अपने को एकधा, दशधा और त्रिधा विभाजित करता है।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 3.6.6 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर अध्याय-पृष्ठ; देवनागरी पाठ सत्यापित प्रतिलिपि से — validation/sanskrit_skandha3.json)
भा. ३.११.३९ में अण्डकोश विकारों से युक्त और विशेष आदि से आच्छादित बताया गया है, तथा बाहर पचास कोटि विस्तृत। भा. ३.११.४० में कहा गया है कि भगवान् परमाणु के समान प्रविष्ट हुए हैं और अन्य अण्ड-राशियाँ भी कोटिशः लक्षित होती हैं।