अश्वमेध यज्ञ
Ashvamedha Yajna
अन्य नाम वाजिमेधः
अश्वमेध यज्ञ — वैदिक श्रौत यज्ञों में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण और विस्तृत; इसमें छोड़े गए अश्व को एक वर्ष तक स्वच्छन्द विचरण करने दिया जाता है और जिन-जिन राज्यों में वह जाता है, उन्हें या तो अधीनता स्वीकार करनी होती है या युद्ध करना पड़ता है, तत्पश्चात् विधिपूर्वक यज्ञ सम्पन्न होता है। यह सार्वभौम सम्राट्-पद और पाप-प्रायश्चित्त दोनों का साधन माना गया। भा. १.१२.३४ में युधिष्ठिर ज्ञाति-द्रोह के प्रायश्चित्त हेतु तीन अश्वमेध करते हैं — यद्यपि भा. १.८.५२ में वे स्वयं कह चुके हैं कि यज्ञों से भूत-हत्या नहीं धुलती; इसीलिए मूल शुद्धि हरि की आराधना से ही होती है ('समयजद्धरिम्')।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.12.34 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=110183)