रुक्मिणी के स्वयंवर में राजाओं को 'भीष्मककन्यया' — भीष्मक की कन्या द्वारा — बुलाया गया था; उन्हें देखते रहना पड़ा जब गरुड़ कृष्ण को ले गये: 'समाहुता भीष्मककन्यया ये' (भा. ३.३.३)।
राजा
भीष्मक
Bhishmaka
भीष्मक — रुक्मिणी के पिता, विदर्भ के राजा। भा. ३.३.३ में उद्धव रुक्मिणी के स्वयंवर का वर्णन करते हुए राजाओं को 'भीष्मककन्यया' बुलाया हुआ बताते हैं — अर्थात भीष्मक की कन्या द्वारा। वे राजा अपनी शोभा को रुक्मिणी की शोभा से बढ़ाना चाहते थे, पर देखते रह गये जब सुपर्ण (गरुड़) अपने मस्तक पर कृष्ण के चरण धारण किये, गांधर्व-विधि से उनका अपना भाग हर ले गये: 'समाहुता भीष्मककन्यया ये' (भा. ३.३.३)।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 3.3.3 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर अध्याय-पृष्ठ; देवनागरी पाठ सत्यापित प्रतिलिपि से — validation/sanskrit_skandha3.json)
रुक्मिणी के पिता; जिनकी कन्या ने राजाओं को बुलाया