Sanatan Info

बीटा AI
सिद्धांत
साझा करें
WhatsApp Facebook X / Twitter Instagram Gmail ईमेल Telegram

ब्रह्म

Brahman

एक अद्वैत तत्त्व, त्रिविध नाम

तत्त्ववित् अद्वैत ज्ञान-तत्त्व को ब्रह्म, परमात्मा, भगवान् कहते हैं: 'ब्रह्मेति परमात्मेति भगवानिति शब्द्यते' (भा. १.२.११)।

ब्रह्मदर्शन — अविद्या-आरोपित सत्-असत् का निषेध

'यत्रैमे सदसद्रूपे प्रतिषिद्धे स्वसंविदा अविद्ययाऽऽत्मनि कृते इति तद्ब्रह्मदर्शनम्' (भा. १.३.३३)।

विशुद्ध, केवल ज्ञान, निर्गुण, नित्य और अद्वय

'विशुद्धं केवलं ज्ञानं प्रत्यक्सम्यगवस्थितम् । सत्यं पूर्णमनाद्यन्तं निर्गुणं नित्यमद्वयम्' (भा. २.६.३९); प्रशान्त मुनि इसे जानते हैं, असत् तर्कों से यह तिरोहित होता है (भा. २.६.४०)।

ब्रह्म — nondual with — परमात्मा

तत्त्ववित् एक अद्वैत तत्त्व कहते हैं जो 'ब्रह्म' और 'परमात्मा' दोनों नामों से व्यक्त होता है: 'ब्रह्मेति परमात्मेति भगवानिति शब्द्यते' (भा. १.२.११)। प्रमाण: प्रत्यक्ष ('अद्वयम्')।

ब्रह्म — nondual with — श्रीकृष्ण

वही अद्वैत तत्त्व 'भगवान्' नाम से भी व्यक्त होता है (भा. १.२.११) — वे भगवान् जो सात्वतां पतिः कृष्ण हैं (भा. १.१.१२)। एक तत्त्व, तीन नाम, जिनमें भगवान् सर्वाधिक पूर्ण है। प्रमाण: अद्वैत-तत्त्व हेतु प्रत्यक्ष; सूक्ष्मता विवरण में सुरक्षित।