विराट् का हृदय विदीर्ण होने पर चन्द्रमा ने स्थान रूप में प्रवेश किया, और अपनी अंश-मन से विक्रिया प्राप्त होती है: 'हृदयं चास्य निर्भिन्नं चन्द्रमा धिष्ण्यमाविशत्' (भा. ३.६.२४)।
देवता
चन्द्र
Chandra
चन्द्रमा — देवता, विराट्-पुरुष के हृदय का अधिष्ठाता। भा. ३.६.२४ में: 'हृदयं चास्य निर्भिन्नं चन्द्रमा धिष्ण्यमाविशत् । मनसांशेन येनासौ विक्रियां प्रतिपद्यते' — विराट् का हृदय विदीर्ण होने पर चन्द्रमा ने स्थान रूप में प्रवेश किया, और मन की अंश से उसमें विक्रिया आती है। इस प्रकार इस क्रम में मन का अधिष्ठाता चन्द्र है, और भा. ३.६.२६ में सत्त्व का अधिष्ठाता महान् (महत्तत्त्व) है।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 3.6.24 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर अध्याय-पृष्ठ; देवनागरी पाठ सत्यापित प्रतिलिपि से — validation/sanskrit_skandha3.json)
हृदय का अधिष्ठान; मन से विक्रिया का कारण