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गंगा

Ganga

अन्य नाम विष्णुपदी · अमर्त्यनदी · स्वर्धुनी · Sva-dhuni (the celestial Ganga)

स्वर्धुनी — स्पर्श-पवित्रीकारी

भगवत्पद-शरण मुनि उनके समान स्पर्श से पवित्र करते हैं: 'स्वर्धुन्यापोऽनुसेवया' (भा. १.१.१५)।

परीक्षित के प्रायोपवेशन का तट

'प्रायोपविष्टं गङ्गायाम्' (भा. १.३.४३)।

हरि के चरण-कमलों की रज से पवित्र जल

'आप्लुता हरिपादाब्जरजःपूतसरिज्जले' (भा. १.८.२) — गङ्गा की पवित्रता का मूल हरि-चरण है।

सप्तर्षियों की प्रीति के लिए सात धाराओं में विभक्त

'स्रोतोभिः सप्तभिर्या वै स्वर्धुनी सप्तधा व्यधात् सप्तानां प्रीतये' (भा. १.१३.५२) — वह स्थान 'सप्तस्रोत' कहलाता है।

तुलसी-मिश्रित कृष्ण-चरण-रज से युक्त जल; दोनों लोकों को पवित्र करती है

'या वै लसच्छ्रीतुलसीविमिश्रकृष्णाङ्घ्रिरेण्वभ्यधिकाम्बुनेत्री पुनाति लोकानुभयत्र सेशान्' (भा. १.१९.६)।