गोप कृष्ण के अनुचर कहलाते हैं, जो उनके साथ गोधन चराते थे: 'चारयन्ननुगान्गोपान् रणद्वेणुररीरमत्' (भा. ३.२.२९); और नन्द 'गोपराज' कहलाते हैं (भा. ३.२.३२)।
गोप
Gopas
अन्य नाम वत्सप
गोप — व्रज के गोपाल समुदाय, जिनके राजा नन्द हैं। भागवत में वे कृष्ण के 'अनुग' कहलाते हैं: विभु गोधन चराते समय इनका अनुगमन करते थे और गूँजती वेणु से इन्हें आनन्दित करते थे (भा. ३.२.२९)। 'वत्सप' (वत्सों के पालक) इनके बालकों का नाम है, जिनसे घिरे कृष्ण यमुना के उपवन में वत्स चराते थे (भा. ३.२.२७)। भा. ३.२.३२ में नन्द 'गोपराज' कहलाते हैं, और भगवान् ने द्विजश्रेष्ठों के द्वारा उन्हीं से गोसव यज्ञ कराया था।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 3.2.27 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर अध्याय-पृष्ठ; देवनागरी पाठ सत्यापित प्रतिलिपि से — validation/sanskrit_skandha3.json)