ब्रह्मा के सत्र में साक्षात् यज्ञपुरुष हयशीर्ष रूप में प्रकट हुए, जिनके श्वास से वेद-वाणियाँ प्रकट हुईं: 'सत्रे ममास भगवान् हयशीर्ष एव साक्षात्स यज्ञपुरुषः' (भा. २.७.११)। प्रमाण: प्रत्यक्ष।
देवता
हयग्रीव
Hayagriva
हयग्रीव अथवा हयशीर्ष भगवान् का अश्व-मुख अवतार हैं, जो वेदों के रक्षक और विद्या के अधिष्ठाता माने जाते हैं; पुराणों में वे मधु और कैटभ द्वारा अपहृत वेदों को पुनः प्राप्त करते हैं। भा. २.७.११ में उनका प्रकटन ब्रह्मा के अपने सत्र में बताया गया है, जहाँ वे 'साक्षात् यज्ञपुरुष' और 'तपनीयवर्ण' अर्थात् तपाए स्वर्ण के रंग वाले कहे गए हैं; और यह विशेष लक्षण दिया गया है कि उनके श्वास लेने मात्र से नासिका से मनोहर वेद-वाणियाँ प्रकट हुईं — जिससे श्रुति की अपौरुषेयता उनके निःश्वास से जोड़ दी जाती है।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 2.7.11 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=200170)
हयग्रीव — avatara of — श्रीकृष्ण