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ज्ञान

Jnana

ज्ञान — तत्त्व-बोध है: वेदान्त-परम्परा में आत्म-ब्रह्म के साक्षात्कार का वह ज्ञान जो अज्ञान का विनाश कर मुक्ति देता है; साधना-त्रयी (कर्म-ज्ञान-भक्ति) में इसका स्थान केन्द्रीय है। संसाधित पदों में: भक्तियोग इसे निःस्वार्थ रूप से देता है (भा. १.२.७); वैराग्य सहित यह श्रद्धालु को आत्म-दर्शन में समर्थ करता है (१.२.१२); यह वासुदेव के लिए है (१.२.२९) और पराकाष्ठा पर अद्वैत है (१.२.११)।

श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.2.7 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=110173)