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कल्प

Kalpa

अन्य नाम Brahma-kalpa (the day of Brahma)

कल्प — काल-विभाग, ब्रह्मा का एक दिन। भा. ३.११.२२ में: 'त्रिलोक्या युगसाहस्रं बहिराब्रह्मणो दिनम् । तावत्येव निशा तात यन्निमीलति विश्वसृक्' — त्रिलोकी के युग-सहस्र के बराबर ब्रह्मा का दिन है और उतनी ही रात्रि, जिसमें विश्वसृज् निमीलित करते हैं। भा. ३.११.२३ में रात्रि के अवसान पर लोक-कल्प आरम्भ होता है और चौदह मनुओं तक चलता है। भा. ३.११.२९-३० में कल्पान्त का दहन और जल-प्लावन वर्णित है। तीन कल्पों के नाम आते हैं: ब्राह्म (भा. ३.११.३४), जिसमें ब्रह्मा उत्पन्न हुए; पाद्म (३५), जिसमें हरि के नाभि-सरोवर से लोक-कमल हुआ; और वाराह (३६), जिसमें हरि सूकर थे। ये प्रत्येक एक बार नामित हैं, अतः पृथक् सत्ता नहीं बनायी गयी।

श्रीमद्भागवतमहापुराण 3.11.22 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर अध्याय-पृष्ठ; देवनागरी पाठ सत्यापित प्रतिलिपि से — validation/sanskrit_skandha3.json)