'यदनुध्यासिना युक्ताः कोविदाः... कर्मग्रन्थिनिबन्धनं छिन्दन्ति' (भा. १.२.१५)।
सिद्धांत
कर्म
Karma
अन्य नाम कर्मग्रन्थि · Karma-granthi (the knot of karma)
कर्म — भारतीय दर्शन की केन्द्रीय धारणा है: क्रिया और उसका अनुषंगी फल — जो जीव को बंधन और पुनर्जन्म में बाँधता है; कर्मकाण्ड (वैदिक यज्ञ-परम्परा) और निष्काम कर्म दोनों अर्थ परम्परा में प्रयुक्त हैं। संसाधित पदों में: इसकी 'ग्रन्थि' भगवत्-ध्यान में युक्त विद्वान् काट देते हैं (भा. १.२.१५); आत्मा में ईश्वर-दर्शन से कर्म क्षीण होते हैं (१.२.२१)।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.2.15 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=110173)
भगवत्-ध्यान से ग्रन्थि-भेद