'खट्वाङ्गो नाम राजर्षिः ज्ञात्वेयत्तामिहायुषः' (भा. २.१.१३) — परीक्षित के सात दिनों के लिए यही दृष्टान्त प्रस्तुत किया गया।
खट्वाङ्ग
Khatvanga
खट्वाङ्ग इक्ष्वाकु-वंश के राजर्षि हैं, जिन्होंने देवासुर-संग्राम में देवताओं की सहायता की थी; प्रसन्न देवताओं ने वर माँगने को कहा तो उन्होंने अपनी शेष आयु पूछी और उत्तर मिला — केवल एक मुहूर्त। भा. २.१.१३ में शुकदेव उन्हें परीक्षित के सामने आदर्श रूप में रखते हैं: 'मुहूर्तात् सर्वमुत्सृज्य गतवानभयं हरिम्' — उन्होंने उसी क्षण सब कुछ त्यागकर अभय हरि की शरण ली। यह दृष्टान्त परीक्षित के सात दिनों को पर्याप्त सिद्ध करने के लिए दिया गया है, और भागवत के इस मूल सिद्धान्त को स्थापित करता है कि मुक्ति के लिए दीर्घ काल नहीं, अपितु जागरूक क्षण अपेक्षित है (भा. २.१.१२)।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 2.1.13 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=332515)
खट्वाङ्ग ने आयु का परिमाण जानकर एक मुहूर्त में सब त्यागकर अभय हरि को प्राप्त किया: 'मुहूर्तात्सर्वमुत्सृज्य गतवानभयं हरिम्' (भा. २.१.१३)। यहाँ 'हरि' भगवान् का नाम है, जो इस संग्रह में krishna इकाई के अन्तर्गत है। प्रमाण: प्रत्यक्ष।