मन्दराचल — देवासुरों द्वारा समुद्र-मथन हेतु प्रयुक्त महापर्वत; पौराणिक भूगोल में इसकी गणना क्रमशः मेरु के सहायक पर्वतों में होती है। भा. १.३.१६: 'सुरासुराणामुदधिं मथ्नतां मन्दराचलम्' — कूर्म-अवतार ने इसी को अपनी पीठ पर धारण किया।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.3.16 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=369178)