मनु-गण — मन्वन्तर-व्यवस्था के स्वामी पितामह: प्रत्येक कल्प में चौदह मनु, जो सृष्टि के युग-चक्र में धर्म-व्यवस्था के आधार होते हैं (स्वायम्भुव, वैवस्वत आदि)। भा. १.३.२७: ऋषि, देव और प्रजापतियों सहित ये सब हरि की कलाएँ हैं।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.3.27 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=369178)