नाग्नजित के स्वयंवर में कृष्ण ने ककुद्मान् और अविद्ध-नासा वाले वृषभों को दबाकर उनकी कन्या (सत्यभामा) से विवाह किया: 'ककुद्मतोऽविद्धनसो दमित्वा स्वयंवरे नाग्नजितीमुवाह' (भा. ३.३.४)।
राजा
नाग्नजित्
Nagnajit
नाग्नजित् — सत्यभामा के पिता, जिनके स्वयंवर में कृष्ण ने विवाह के लिये रखी शर्त पूरी की। भा. ३.३.४ में उद्धव कहते हैं कि कृष्ण ने 'ककुद्मतोऽविद्धनसो दमित्वा' — ककुद्मान् और अविद्ध-नासा वाले वृषभों को दबाकर — 'स्वयंवरे नाग्नजितीम् उवाह', अर्थात नाग्नजित की कन्या से विवाह किया। तदनन्तर मानभंग होने पर भी लालायित उन अज्ञ राजाओं को कृष्ण ने स्वयं अक्षत रहते उनके ही शस्त्रों से मार डाला।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 3.3.4 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर अध्याय-पृष्ठ; देवनागरी पाठ सत्यापित प्रतिलिपि से — validation/sanskrit_skandha3.json)
कृष्ण के हाथों अपने वृषभों का दमन