ऋषियों ने यहाँ स्वर्ग-लोक हेतु सहस्र-वर्षीय सत्र किया (भा. १.१.४); कलि आने पर हरि-कथा सहित दीर्घसत्र में बैठे रहे (भा. १.१.२१)।
नैमिषारण्य
Naimisharanya
अन्य नाम वैष्णवक्षेत्र · Vaishnava-kshetra (sacred field of Vishnu) · अनिमिषक्षेत्र · Animisha-kshetra (abode of the Unblinking Lord)
नैमिषारण्य — भारत के प्राचीनतम पवित्र तीर्थ-आश्रमों में से एक, जो वर्तमान उत्तर प्रदेश (सीतापुर के पास मिश्रित नैमिष क्षेत्र) में स्थित माना जाता है; पुराणों में यह वह तपोभूमि है जहाँ ऋषियों की सभाएँ बैठती थीं और पुराण-कथा का प्रचार हुआ। संसाधित पदों में: यह 'अनिमिषक्षेत्र' — अनिमिष प्रभु का क्षेत्र (भा. १.१.४) — और 'वैष्णवक्षेत्र' — विष्णु का पवित्र क्षेत्र (१.१.२१) कहलाया। यहीं शौनकादि ऋषियों ने लोक-कल्याण हेतु सहस्र-वर्षीय सत्र किया (१.१.४) और कलि के आगमन को जानकर हरि-कथा में रममाण दीर्घसत्र में बैठे रहे (१.१.२१)।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.1.4 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=110172)