भा. ३.२.२६ कृष्ण के निवास-स्थान को 'नन्दव्रज' कहती है — नन्द का व्रज। वहाँ कृष्ण बलराम के साथ ग्यारह वर्ष अपनी ज्योति छिपाये रहे।
नन्द
Nanda
नन्द गोकुल के गोपों के अधिपति, यशोदा के पति और कृष्ण के पालक पिता हैं; वसुदेव ने जन्म-रात्रि में शिशु को उन्हीं के घर पहुँचाया था। भागवत के दशम स्कन्ध में उनका चरित्र सरल, श्रद्धालु और पुत्र-वत्सल गृहस्थ का है। भा. २.७.३१ में वह प्रसङ्ग सङ्केतित है जिसमें द्वादशी की रात्रि में अनुचित समय पर यमुना में स्नान करने से वरुण के अनुचर उन्हें पकड़ ले गए और कृष्ण ने वरुण-लोक जाकर उन्हें छुड़ाया; उसी श्लोक में यह भी कहा गया है कि दिन भर परिश्रम कर रात्रि में सोए हुए गोकुल-वासियों को वे वैकुण्ठ-लोक तक पहुँचाएँगे।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 2.7.31 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=200170)