'दृष्ट्वात्मनो भगवतो नियमावलोपं देव्यस्त्वनङ्गपृतना घटितुं न शेकुः' (भा. २.७.६); जिनके अन्तर में रोष भी प्रवेश करते हुए भयभीत होता है, वहाँ काम आश्रय कैसे ले (भा. २.७.७)।
नर
Nara
अन्य नाम नरोत्तम · Narottama (best of men)
नर — प्राचीन तपस्वी ऋषि: बदरिकाश्रम में नारायण के साथ तपस्या करने वाले प्रसिद्ध ऋषि-युग्ल 'नर-नारायण' का एक; महाभारत-परम्परा में अर्जुन इन्हीं का अंश माना गया। संसाधित पदों में: सूत ने कथा-प्रारम्भ में नारायण, सरस्वती और व्यास के साथ इन्हें 'नरोत्तम' कहकर नमस्कार किया (भा. १.२.४)। भा. १.३.९ निर्णायक है: भगवान् 'नरनारायणौ ऋषी भूत्वा' — इन दोनों ऋषि रूपों में धर्मकला-सर्ग में घोर तप करते हैं; अतः ये भगवान् के धारित अवतार-रूप हैं (पुनर्विलोकन-झंडा निरस्त)।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.2.4 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=110173)
भा. ३.४.२२ नर को 'भगवान् ऋषिः' कहकर नारायण के साथ नामित करती है; दोनों को 'लोकभावनौ' कहा गया है और बदरी में उनका दीर्घ तप बताया गया है।
भगवान् नर-नारायण ऋषि-युग्ल रूप धारण करते हैं: 'नरनारायणौ ऋषी भूत्वा' (भा. १.३.९)। इसी पाठ से १.२.४ की पहचान-समस्या का निर्णय होता है। प्रमाण: प्रत्यक्ष।