'ददार करजैः... एरकां कटकृद्यथा' (भा. १.३.१८; पाठभेद: वक्षसि)।
नरसिंह
Narasimha
नृसिंह — विष्णु का अर्ध-नर अर्ध-सिंह अवतार: हिरण्यकशिपु के वध हेतु स्तम्भ से प्रकट, दिन-रात की सन्ध्या पर प्रह्लाद की रक्षा करने वाले; भक्त-प्रतिपालक उग्र-रूप के प्रतीक। भा. १.३.१८: 'चतुर्दशं नारसिंहं बिभ्रत्' — चौदहवाँ अवतार, जिन्होंने नखों से दैत्यराज को विदीर्ण किया।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.3.18 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=369178)
चतुर्दश: 'चतुर्दशं नारसिंहं बिभ्रत्' (भा. १.३.१८)। प्रमाण: प्रत्यक्ष।
नरसिंह ने नखों से दैत्यराज को विदीर्ण किया: 'ददार करजैः... दैत्येन्द्रमूर्जितम्' (भा. १.३.१८); दैत्येन्द्र = हिरण्यकशिपु, सर्वसम्मत पाठ। प्रमाण: कृत्य प्रत्यक्ष; तादात्म्य प्रबल साक्ष्य।