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नारायण
ऋषि
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नारायण

Narayana

वेद, देव, लोक, यज्ञ, योग, तप, ज्ञान और गति — सब नारायण-परायण

'नारायणपरा वेदा देवा नारायणाङ्गजाः । नारायणपरा लोका नारायणपरा मखाः' (भा. २.५.१५); 'नारायणपरो योगो… नारायणपरा गतिः' (भा. २.५.१६)।

नाम की व्युत्पत्ति — जल पुरुष से उत्पन्न, उन्हीं में सहस्र वर्ष निवास

'तास्ववात्सीत्स्वसृष्टासु सहस्रं परिवत्सरान् । तेन नारायणो नाम यदापः पुरुषोद्भवाः' (भा. २.१०.११)।

नर के साथ बदरी में दीर्घ तप

भा. ३.४.२२ में देव नारायण और भगवान् ऋषि नर को 'लोकभावनौ' — लोकों का भावन करने वाला — कहकर बदरी में दीर्घ, तीव्र किन्तु मृदु तप करते बताया गया है: 'मृदु तीव्रं तपो दीर्घं तेपाते लोकभावनौ'।

नारायण — avatara of — श्रीकृष्ण

'नरनारायणौ ऋषी भूत्वा' (भा. १.३.९) — ऋषि नारायण भगवान् के धारित रूप हैं; 'नारायण' नाम स्वयं भगवान् का भी है (भा. १.२.२६) — वह 'krishna' का विशेषण है, यहाँ विलीन नहीं। प्रमाण: प्रत्यक्ष (ऋषि-रूप हेतु)।