'ब्रह्मेति परमात्मेति भगवानिति शब्द्यते' (भा. १.२.११)।
सिद्धांत
परमात्मा
Paramatman
परमात्मा — सर्वान्तर्यामी परम आत्मा है: वेदान्त-परम्परा में ईश्वर का वह रूप जो प्रत्येक हृदय और प्रत्येक परमाणु में साक्षी-रूप से व्याप्त रहता है (क्षीर-नीर न्याय समान ब्रह्म का सगुण स्वरूप)। संसाधित पदों में यह उसी एक अद्वैत तत्त्व का दूसरा नाम है जो ब्रह्म और भगवान् कहलाता है: 'ब्रह्मेति परमात्मेति भगवानिति शब्द्यते' (भा. १.२.११)।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.2.11 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=110173)
अद्वैत तत्त्व का एक नाम
आश्रय — जिससे आभास और निरोध निश्चित होते हैं
'आभासश्च निरोधश्च यतश्चाध्यवसीयते । स आश्रयः परं ब्रह्म परमात्मेति शब्द्यते' (भा. २.१०.७); त्रिविध पुरुष को जानने वाला आत्मा 'स्वाश्रयाश्रयः' है (भा. २.१०.९)।