कृष्ण अपनी प्रिया को प्रसन्न करने के लिये, ग्रामीण पति की भाँति, द्युतरु (पारिजात) को लाने गये; इसी कारण वज्रधारी इंद्र सगण क्रोध से उन पर दौड़े: 'विधित्सुरार्च्छद् द्युतरुं यदर्थे । वज्र्याद्रवत्तं सगणो रुषान्धः' (भा. ३.३.५)।
द्युतरु
Dyutaru
अन्य नाम पारिजात · Parijata
द्युतरु, अर्थात पारिजात — स्वर्ग का वृक्ष, जिसे कृष्ण सत्यभामा के लिये पृथ्वी पर लाये। भा. ३.३.५ में उद्धव कहते हैं कि प्रभु, अपनी प्रिया को प्रसन्न करने की इच्छा से, 'ग्राम्य इव' — एक साधारण ग्रामीण पति की भाँति — 'द्युतरुं' लाने गये; इसी कारण वज्रधारी इंद्र अपनी पत्नियों से प्रेरित होकर, क्रोध से अंध हो, सगण उन पर दौड़े। भागवत इस प्रसंग में इंद्र को 'वधूनाम् क्रीडामृग' कहती है। वृष्ट होने वाला यह वृक्ष भागवत में द्युतरु नाम से ही आता है।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 3.3.5 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर अध्याय-पृष्ठ; देवनागरी पाठ सत्यापित प्रतिलिपि से — validation/sanskrit_skandha3.json)