भा. ३.८.९ में मैत्रेय कहते हैं: 'प्रोवाच मह्यं स दयालुरुक्तो मुनिः पुलस्त्येन पुराणमाद्यम्' — वह दयालु मुनि, कहे जाने पर, मुझे आद्य पुराण कहा, पुलस्त्य के द्वारा। 'पुलस्त्येन' करण-कारक है, किन्तु श्लोक स्पष्ट नहीं कहता कि उन्होंने किसे कहा — भा. ३.८.८ में साङ्ख्यायन को पहले ही पराशर का उपदेष्टा बताया जा चुका है। अतः कोई गुरु-शिष्य सम्बन्ध नहीं जोड़ा गया।
पुलस्त्य
Pulastya
पुलस्त्य — ऋषि, जिनका नाम भागवत की परम्परा में भा. ३.८.९ में आता है। मैत्रेय कहते हैं: 'प्रोवाच मह्यं स दयालुरुक्तो मुनिः पुलस्त्येन पुराणमाद्यम्' — वह दयालु मुनि, कहे जाने पर, मुझे आद्य पुराण कहा, पुलस्त्य के द्वारा। 'पुलस्त्येन' करण-कारक है और श्लोक स्पष्ट नहीं कहता कि उन्होंने किसे कहा, क्योंकि पूर्व श्लोक में साङ्ख्यायन को ही पराशर का उपदेष्टा बताया जा चुका है। अतः भागवत-संग्रह में उनके लिये कोई गुरु-शिष्य सम्बन्ध नहीं जोड़ा गया है; यह अनिश्चय यहीं दर्ज है।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 3.8.9 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर अध्याय-पृष्ठ; देवनागरी पाठ सत्यापित प्रतिलिपि से — validation/sanskrit_skandha3.json)