बकी (पूतना) ने दुष्ट भाव से कृष्ण को अपने स्तन का कालकूट पिलाया, फिर भी उन्हें धात्री के योग्य गति मिली: 'अहो बकी यं स्तनकालकूटं जिघांसयापाययदप्यसाध्वी । लेभे गतिं धात्र्युचिताम्' (भा. ३.२.२३)।
पूतना
Putana
पूतना कंस द्वारा भेजी गई राक्षसी है, जो सुन्दर स्त्री का रूप धारण कर गोकुल आई और विष लगे स्तन से शिशु कृष्ण को मारना चाहती थी; भगवान् ने स्तनपान करते हुए उसके प्राण ही खींच लिए और वह अपने विकराल रूप में गिरकर मरी। वैष्णव आचार्य इस प्रसङ्ग पर विशेष बल देते हैं कि भाव कपटपूर्ण होने पर भी धात्री-रूप में स्तनपान कराने के कारण उसे माता की गति प्राप्त हुई — जो भगवान् की उदारता का प्रमाण है। भा. २.७.२७ में इसे 'तोकेन जीवहरणं यदुलूकिकायाः' कहकर उन तीन बाल-लीलाओं में गिना गया है जो 'अन्यथा सम्भव नहीं' — अर्थात् जिनसे शिशु की दिव्यता सिद्ध होती है।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 2.7.27 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=200170)