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रुद्रपार्षद
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रुद्रपार्षद

Rudra-parshadas

नाभि के व्योम का आश्रय; तृतीय स्वभाव से उत्पत्ति

मैत्रेय कहते हैं कि तृतीय स्वभाव से वे गण उत्पन्न हुए जो दोनों के मध्य के व्योम — नाभि — का आश्रय लेते हैं, और वे रुद्र के पार्षद हैं: 'तार्तीयेन स्वभावेन भगवन्नाभिमाश्रिताः । उभयोरन्तरं व्योम ये रुद्रपार्षदां गणाः' (भा. ३.६.२९)।