घोर संसृति — नाम से तत्क्षण मुक्ति
'आपन्नः संसृतिं घोरां यन्नाम विवशो गृणन्' (भा. १.१.१४)।
Samsara
अन्य नाम संसृतिः · Samsriti (the round of rebirth)
संसार (संसृति) — हिन्दू दर्शन की मूलभूत धारणा है: जन्म-मरण का अनादि चक्र जिसमें जीव कर्मों के अनुसार भिन्न-भिन्न योनियों में भ्रमण करता है और जिससे मोक्ष द्वारा मुक्ति अभीष्ट है। संसाधित पदों में इसे 'घोर' कहा गया (भा. १.१.१४) — इसमें फँसा असहाय जीव भी भगवन्नाम के स्मरण मात्र से तत्क्षण मुक्त हो जाता है; यह वह है जिससे स्वयं भय भी भागता है।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.1.14 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=110172)
'आपन्नः संसृतिं घोरां यन्नाम विवशो गृणन्' (भा. १.१.१४)।