कृष्ण ने सांदीपनि से एक ही बार कहे गये ब्रह्म (वेद) को सविस्तार सीखा, और बदले में उन्हें उनका मृत पुत्र लौटा दिया जो पंचजन के उदर में था: 'सान्दीपनेः सकृत्प्रोक्तं ब्रह्माधीत्य सविस्तरम्' (भा. ३.३.२)।
ऋषि
सान्दीपनि
Sandipani
सांदीपनि — कृष्ण और बलराम के गुरु। भागवत के तीसरे स्कन्ध में उद्धव विदुर को बताते हैं कि कृष्ण ने इनसे एक ही बार कहे गये ब्रह्म (वेद) को सविस्तार सीखा, और गुरुदक्षिणा के रूप में इनका मृत पुत्र — जो पंचजन नामक असुर के उदर में था — निकालकर इन्हें लौटा दिया: 'सान्दीपनेः सकृत्प्रोक्तं ब्रह्माधीत्य सविस्तरम् । तस्मै प्रादाद्वरं पुत्रं मृतं पञ्चजनोदरात्' (भा. ३.३.२)। 'सकृत्प्रोक्तम्' — एक ही बार कहा गया — इस उपलब्धि का मापदंड है।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 3.3.2 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर अध्याय-पृष्ठ; देवनागरी पाठ सत्यापित प्रतिलिपि से — validation/sanskrit_skandha3.json)
कृष्ण के गुरु; एक बार कहे गये वेद का अध्ययन और मृत पुत्र की प्राप्ति