भा. ३.८.८ में साङ्ख्यायन को 'पारमहंस्यमुख्य' कहा गया है, जो भगवद्-विभूतियों को कहने की इच्छा रखते हुए मैत्रेय के गुरु पराशर को और बृहस्पति को कहते हैं। भा. ३.८.७ में उन्हें 'धृतव्रत' कहा गया है।
ऋषि
साङ्ख्यायन
Sankhyayana
साङ्ख्यायन — ऋषि, परमहंसों में मुख्य, भागवत की परम्परा में सनत्कुमार और पराशर के बीच की कड़ी। भा. ३.८.७ में उन्हें 'धृतव्रत' कहा गया है और सनत्कुमार द्वारा कथित बताया गया है। भा. ३.८.८ में मैत्रेय कहते हैं: 'साङ्ख्यायनः पारमहंस्यमुख्यो विवक्षमाणो भगवद्विभूतीः । जगाद सोऽस्मद्गुरवेऽन्विताय पराशरायाथ बृहस्पतेश्च' — भगवद्-विभूतियों को कहने की इच्छा रखते हुए उन्होंने मैत्रेय के गुरु पराशर को और बृहस्पति को कहा।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 3.8.8 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर अध्याय-पृष्ठ; देवनागरी पाठ सत्यापित प्रतिलिपि से — validation/sanskrit_skandha3.json)
परमहंसों में मुख्य; पराशर और बृहस्पति को उपदेष्टा