'चेत एतैरनाविद्धं स्थितं सत्त्वे प्रसीदति' (भा. १.२.१९)।
सत्त्वगुण
Sattva-guna
अन्य नाम सत्त्व · Sattva
सत्त्वगुण — प्रकृति के तीन गुणों में प्रथम और श्रेष्ठ है: प्रकाश, पवित्रता, संतुलन और ज्ञान-प्रवृत्ति का स्वभाव — जो चित्त को शान्त और सात्त्विक बनाता है। संसाधित पदों में: रज-तम (काम, लोभ आदि) धुल जाने पर सत्त्व में स्थित चित्त प्रसन्न-संतुष्ट होता है (भा. १.२.१९); सत्त्व रजस् से उत्पन्न माना गया और इसे 'ब्रह्मदर्शन' कहा गया (१.२.२४); भगवान् सत्त्व से लोकों का पोषण करते हैं (१.२.३४)।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.2.19 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=110173)
'तस्मात्सत्त्वं यद्ब्रह्मदर्शनम्' (भा. १.२.२४)।
रजस् से सत्त्व उत्पन्न होता है: 'तस्मात्सत्त्वं यद्ब्रह्मदर्शनम्' (भा. १.२.२४)। प्रमाण: प्रत्यक्ष।