भा. ३.८.२८ में भगवान् 'हारेण चानन्तधनेन वत्स श्रीवत्सवक्षःस्थलवल्लभेन' — अनन्त-धन वाले हार से, जो वक्षस्थल के श्रीवत्स को प्रिय है — वर्णित हैं। श्लोक श्रीवत्स को वक्षस्थल पर स्थित एक चिह्न बताता है।
वस्तु
श्रीवत्स
Shrivatsa
श्रीवत्स — वस्तु, भगवान् के वक्षस्थल पर का चिह्न। भा. ३.८.२८ में वे 'हारेण चानन्तधनेन वत्स श्रीवत्सवक्षःस्थलवल्लभेन' वर्णित हैं — अनन्त-धन वाले हार से, जो वक्षस्थल के श्रीवत्स को प्रिय है। ध्यान दीजिये कि यहाँ 'अनन्तधन' का अर्थ अपार धन है, नाग अनन्त नहीं; अतः शेष के नाम पर कोई विशेषण-पङ्क्ति नहीं जोड़ी गयी।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 3.8.28 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर अध्याय-पृष्ठ; देवनागरी पाठ सत्यापित प्रतिलिपि से — validation/sanskrit_skandha3.json)
वक्षस्थल का चिह्न, जिसे हार प्रिय है