'अधिक्रमन्त्यङ्घ्रिभिराहृतां बलात्सभां सुधर्मां सुरसत्तमोचिताम्' (भा. १.१४.३८); वहीं गोविन्द सुहृदों से घिरे विराजते हैं (भा. १.१४.३४)।
वस्तु
सुधर्मा सभा
Sudharma Sabha
सुधर्मा सभा — देवताओं की वह सभा-भवन जो इन्द्र-लोक से द्वारका लाई गई; इसकी विशेषता यह मानी जाती है कि जो इसमें प्रवेश करता है वह क्षुधा, तृषा, जरा और मृत्यु के प्रभाव से मुक्त रहता है। भा. १.१४.३८ में कहा गया है कि यदु-प्रवीर 'बलपूर्वक लाई गई और श्रेष्ठ देवताओं के योग्य' इस सभा में निर्भय होकर विचरते हैं, और भा. १.१४.३४ में युधिष्ठिर पूछते हैं कि क्या गोविन्द इसी सुधर्मा में सुहृदों से घिरे सुखपूर्वक हैं।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.14.34 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=110185)
देवताओं के योग्य सभा-भवन, बलपूर्वक द्वारका लाई गई