त्वचा का अधिष्ठान; रोमों से कण्डू का कारण
विराट् की त्वचा विदीर्ण होने पर ओषधियों ने स्थान प्रविष्ट किया, और अपनी अंश रोमों से कण्डू प्राप्त होती है: 'त्वचमस्य विनिर्भिन्नां विविशुर्धिष्ण्यमोषधीः' (भा. ३.६.१८)।