भा. ३.८.५ में नागराज की कन्याएँ, वर की कामना रखती हुई, प्रेमपूर्वक नाना बलियों से कमल की अर्चना करती हैं और स्वर्ण धुनी के उदक तथा अपनी जटा-कलापों से चरण-उपधान को स्पर्श करती हैं: 'पद्मं यदर्चन्त्यहिराजकन्याः सप्रेमनानाबलिभिर्वरार्थाः'।
नाग
The Nagas
अन्य नाम Ahiraja-kanya (daughters of the serpent king)
नाग — समूह, जिनमें नागराज की कन्याएँ भगवान् के चरणोपधान की सेवा करती हैं। भा. ३.८.५ में: 'स्वर्धुन्युदार्द्रैः स्वजटाकलापैरुपस्पृशन्तश्चरणोपधानम् । पद्मं यदर्चन्त्यहिराजकन्याः सप्रेमनानाबलिभिर्वरार्थाः' — वे प्रेमपूर्वक नाना बलियों से कमल की अर्चना करती हैं और स्वर्ण धुनी के उदक तथा अपनी जटा-कलापों से चरण-उपधान को स्पर्श करती हैं, वर की कामना रखती हुई। 'अहिराज' से तात्पर्य शेष से है, जो रोस्टर में 'शेष' के रूप में पहले से हैं।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 3.8.5 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर अध्याय-पृष्ठ; देवनागरी पाठ सत्यापित प्रतिलिपि से — validation/sanskrit_skandha3.json)