भा. ३.७.३३ में नक्षत्रों का उल्लेख 'ग्रहनक्षत्रताराणां' में आता है, जहाँ विदुर काल के अवयवों की संस्थिति पूछते हैं। भागवत यहाँ नक्षत्रों को काल-गणना का एक वर्ग मानता है।
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नक्षत्र
The Nakshatras
नक्षत्र — समूह, चन्द्र की नक्षत्र-मण्डलियाँ। भा. ३.७.३३ में इनका उल्लेख 'ग्रहनक्षत्रताराणां कालावयवसंस्थितिम्' में आता है, जहाँ विदुर ग्रह, नक्षत्र, तारा और कालावयव की संस्थिति पूछते हैं। भागवत इन्हें काल-विभाग के सन्दर्भ में रखता है, अतः ये केवल तारा-समूह नहीं, काल-गणना का एक वर्ग हैं।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 3.7.33 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर अध्याय-पृष्ठ; देवनागरी पाठ सत्यापित प्रतिलिपि से — validation/sanskrit_skandha3.json)
ग्रह और ताराओं के साथ नामित