भा. ३.८.१२ में भगवान् जल में 'चतुर्युगानां च सहस्रमप्सु स्वपन्' — चतुर्युगों के सहस्र काल तक सोते हुए — बताये गये हैं। इसलिये युग-चक्र को कालि-युग और द्वापर-युग से पृथक्, एक समग्र काल-माप के रूप में घोषित किया गया है।
युग
The Yuga Cycle
अन्य नाम Chatur-yuga (the cycle of four ages)
युग-चक्र — काल-माप, जिसका उल्लेख भा. ३.८.१२ में 'चतुर्युगानां च सहस्रमप्सु स्वपन्' में आता है — भगवान् जल में चतुर्युगों के सहस्र काल तक सोते हैं। रोस्टर में कालि-युग और द्वापर-युग पृथक् सत्ताएँ हैं; यहाँ श्लोक समग्र चक्र की बात करता है, अतः 'युग' को एक समग्र काल-माप के रूप में घोषित किया गया है। भा. ३.८.२३ में 'युगान्ततोये' और भा. ३.८.१७ में 'युगान्तश्वसनावघूर्णजलोर्मिचक्रात्' में युगान्त का उल्लेख भी इसी चक्र के अन्त को कहता है।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 3.8.12 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर अध्याय-पृष्ठ; देवनागरी पाठ सत्यापित प्रतिलिपि से — validation/sanskrit_skandha3.json)
भा. ३.११.२२ में ब्रह्मा का दिन त्रिलोकी के युग-सहस्र के बराबर बताया गया है और रात्रि उतनी ही। भा. ३.११.२० में सन्ध्या और अंश के मध्य के काल को ही युक कहा गया है, जिसमें धर्म विहित होता है।