भक्तियोग-जन्य निःस्वार्थ वैराग्य
'जनयत्याशु वैराग्यम्' (भा. १.२.७)।
Vairagya
वैराग्य — वैराग्य अर्थात् अनात्म-वस्तुओं से विरक्ति, राग-द्वेष के बंधनों से चित्त की स्वाधीनता — भारतीय साधना-परम्परा का आधारभूत अंग है (ज्ञान-वैराग्य युग्म वेदान्त-परम्परा में सुप्रसिद्ध)। संसाधित पदों में: वासुदेव में युक्त भक्तियोग इसे शीघ्र और निःस्वार्थ रूप से उत्पन्न करता है: 'जनयत्याशु वैराग्यम्' (भा. १.२.७)।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.2.7 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=110173)
'जनयत्याशु वैराग्यम्' (भा. १.२.७)।