भा. ३.८.३१ में हरि 'स्वकीर्तिमय्या वनमालया' — अपनी कीर्ति से बनी वनमाला से — युक्त बताये गये हैं। भा. ३.८.२४ में 'वनस्रजः' का उल्लेख रूप के वर्णन में आता है।
वस्तु
वनमाला
Vanamala
वनमाला — वस्तु, भगवान् की माला, जिसे भागवत उनकी अपनी कीर्ति से बना बताता है। भा. ३.८.३१ में ब्रह्मा हरि का ध्यान करते हैं, जो 'स्वकीर्तिमय्या वनमालया' युक्त हैं और 'आम्नायमधुव्रतश्रिया' — वेद के मधुव्रतों की शोभा से — नीवीबद्ध हैं। भा. ३.८.२४ में रूप-वर्णन में 'वनस्रजः' का उल्लेख आता है।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 3.8.31 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर अध्याय-पृष्ठ; देवनागरी पाठ सत्यापित प्रतिलिपि से — validation/sanskrit_skandha3.json)
भगवान् की अपनी कीर्ति से बनी माला