Sanatan Info

बीटा AI
Group
साझा करें
WhatsApp Facebook X / Twitter Instagram Gmail ईमेल Telegram

वृष्णि कुल

Vrishnis

वारुणी-पान से स्वयं विनाश

अनुज्ञा पाकर वृष्णि और भोज वारुणी पीकर विभ्रंशित-ज्ञान हो गये और दुरुक्तियों से एक-दूसरे के मर्म स्पर्श करने लगे; मैरेय के दोष से विषम-चित्त हो, सूर्यास्त में उनका परस्पर मर्दन हुआ — 'वेणूनामिव मर्दनम्', जैसे बाँसों की आपसी रगड़ (भा. ३.४.१-२)।