विदुर ने प्रभास में अपने स्वजनों के विनाश का समाचार सुना; श्लोक उस विनाश की तुलना बाँस के वन में लगी आग से करता है, जिसका कारण 'संस्पर्धया' (आपसी प्रतिस्पर्धा) बताया गया है: 'संस्पर्धया दग्धमथानुशोचन्' (भा. ३.१.२१)।
यदुवंशी
Yadus
यदु-वंश (यादव) — चन्द्रवंशी राजा यदु से उत्पन्न कुल, जिसमें वृष्णि, अन्धक, भोज और सात्वत शाखाएँ सम्मिलित हैं; कृष्ण और बलराम इसी वंश में प्रकट हुए। भा. १.८.३२ में कहा गया है कि अजन्मा भगवान् ने 'यदोः प्रियस्य अन्ववाये' — प्रिय यदु के वंश में — उसकी कीर्ति के लिए जन्म लिया, जैसे मलय पर्वत पर चन्दन उत्पन्न होता है। भा. १.८.३८ में कुन्ती यदुओं और पाण्डवों को एक ही श्वास में गिनती हैं।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.8.32 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=196197)
नगरी में क्रीड़ा करते यदु और भोज के कुमारकों ने भगवन्मत-कोविद मुनियों का अपमान किया और शाप पाया; तदनन्तर कुछ मासों में वृष्णि, भोज, अन्धक आदि देवों द्वारा मोहित होकर प्रभास को गये (भा. ३.३.२४-२५)।