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Ahoi Ashtami

माताएँ संतान की कल्याण हेतु व्रत रखती हैं और अहोई देवी की पूजा करती हैं।

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अहोई अष्टमी वह त्योहार है जिसमें माताएँ संतान की कल्याण हेतु व्रत रखती हैं और अहोई देवी की पूजा करती हैं।

त्योहार की कथाएँ

माँ का व्रत

अहोई अष्टमी माताएँ संतान के कल्याण के लिए मनाती हैं। बच्चों की रक्षा के लिए जगदम्बा के रूप अहोई देवी की पूजा होती है, और तारे देखकर व्रत तोड़ा जाता है।
North India regional tradition

क्यों मनाते हैं

अहोई अष्टमी वह त्योहार है जिसमें माताएँ संतान की कल्याण हेतु व्रत रखती हैं और अहोई देवी की पूजा करती हैं।
उत्तर भारत क्षेत्रीय परंपरा

कब

अहोई अष्टमी कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी को पड़ती है (अक्टूबर-नवंबर), दीपावली से आठ दिन पहले।

कब से मनाया जाता है

अहोई अष्टमी व्रत प्राचीन उत्तर भारतीय परंपरा है।
उत्तर भारत क्षेत्रीय परंपरा

कौन मनाता है

उत्तर भारत में माताएँ संतान की दीर्घायु व कल्याण के लिए इसे मनाती हैं।

उत्पत्ति

इसकी उत्पत्ति माताओं के संतान हेतु व्रत से है, जो अहोई देवी और तारों का सम्मान करती हैं।
उत्तर भारत क्षेत्रीय परंपरा

पूजनीय देवता

अहोई देवी, और सायं खिड़की से दिखने वाले तारे।

कैसे मनाएँ

माताएँ व्रत रखती हैं, अहोई देवी का चित्र बनाकर पूजा करती हैं, और तारे देखकर व्रत तोड़ती हैं।

विधि व प्रसाद

अहोई पूजा, व्रत, और मिठाई व फल का भोग।

मुख्य तथ्य

अहोई अष्टमी दीपावली से आठ दिन पहले पड़ती है।
Regional tradition