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त्योहार प्रोफ़ाइल

Dattatreya Jayanti

भगवान दत्तात्रेय का जन्म — ब्रह्मा, विष्णु और शिव का संयुक्त रूप।

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दत्तात्रेय जयंती भगवान दत्तात्रेय के जन्म का उत्सव है, जो त्रिमूर्ति ब्रह्मा, विष्णु और शिव का संयुक्त रूप हैं।

त्योहार की कथाएँ

अत्रि और अनसूया के पुत्र

त्रेता युग
ऋषि अत्रि और उनकी पत्नी अनसूया को ब्रह्मा, विष्णु और शिव के संयुक्त रूप वाला पुत्र मिला। दत्तात्रेय अद्वैत और त्रिमूर्ति की एकता के आचार्य के रूप में पूजे जाते हैं।
Puranic tradition

क्यों मनाते हैं

दत्तात्रेय जयंती भगवान दत्तात्रेय के जन्म का उत्सव है, जो त्रिमूर्ति ब्रह्मा, विष्णु और शिव का संयुक्त रूप हैं।
पौराणिक परंपरा

कब

दत्तात्रेय जयंती मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा को पड़ती है (नवंबर-दिसंबर)।

कब से मनाया जाता है

दत्तात्रेय परंपरा प्राचीन है, पौराणिक कथा से जुड़ी।
पौराणिक परंपरा

कौन मनाता है

दत्तात्रेय भक्त, विशेषकर महाराष्ट्र और कर्नाटक में इसे मनाते हैं।

उत्पत्ति

इसकी उत्पत्ति अत्रि और अनसूया के पुत्र दत्तात्रेय के जन्म से है, जो त्रिमूर्ति का संयुक्त अवतार हैं।
पौराणिक परंपरा

पूजनीय देवता

भगवान दत्तात्रेय (ब्रह्मा, विष्णु और शिव का संयुक्त रूप)।

कैसे मनाएँ

दत्तात्रेय पूजा करें, उनका मंत्र जपें, और दत्तात्रेय मंदिर जाएँ।

विधि व प्रसाद

दत्तात्रेय पूजा, मंत्र जप, और तीन-मुखी प्रतिमा की पूजा।

मुख्य तथ्य

दत्तात्रेय तीन मुख और चार कुत्तों के साथ दर्शाए जाते हैं, जो चार वेदों के प्रतीक हैं।
Puranic tradition