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धनतेरस

धनतेरस — धन की देवी की पूजा और कीमती धातु खरीदने का शुभ दिन।

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धनतेरस, दीपावली का पहला दिन, धन और समृद्धि को समर्पित है, जब लोग सोना, चाँदी या बर्तन खरीदते हैं और देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं।

त्योहार की कथाएँ

जीवन बचाने वाला दीया

भविष्यवाणी थी कि राजा हिम के पुत्र की विवाह की चौथी रात सर्पदंश से मृत्यु होगी। उसकी पत्नी ने दीयों से उसे जगाए रखा और चारों ओर सोना व सिक्के रखे। जब यम आए, उजाला उन्हें अंधा कर गया और उन्होंने राजकुमार को बचा लिया।
Dhanteras legend

जीवन बचाने वाला दीया

भविष्यवाणी थी कि राजा हिम के पुत्र की विवाह की चौथी रात सर्पदंश से मृत्यु होगी। उसकी पत्नी ने दीयों से उसे जगाए रखा और चारों ओर सोना व सिक्के रखे। जब यम आए, उजाला उन्हें अंधा कर गया और उन्होंने राजकुमार को बचा लिया।
Dhanteras legend

क्यों मनाते हैं

धनतेरस, दीपावली का पहला दिन, धन और समृद्धि को समर्पित है, जब लोग सोना, चाँदी या बर्तन खरीदते हैं और देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं।
दीपावली क्षेत्रीय परंपरा

कब

धनतेरस कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को पड़ती है।

कब से मनाया जाता है

धन्वंतरि और यमदीप की कथाएँ त्योहार को प्राचीन पौराणिक काल में रखती हैं।
पौराणिक कथा; क्षेत्रीय परंपरा

कौन मनाता है

पूरे भारत के हिंदु, विशेषकर व्यापारी और परिवार इसे मनाते हैं।

उत्पत्ति

इसकी उत्पत्ति राजा हिम के पुत्र की कथा से जुड़ी है, जिसका जीवन पत्नी के दीयों और आभूषणों से बचा, और देवताओं के चिकित्सक धन्वंतरि से।
राजा हिम की कथा; धन्वंतरि परंपरा

पूजनीय देवता

देवी लक्ष्मी, भगवान कुबेर, और भगवान धन्वंतरि।

कैसे मनाएँ

घर साफ व सजाएँ, सोना/चाँदी या बर्तन खरीदें, यमदीप जलाएँ, और सायं लक्ष्मी-कुबेर की पूजा करें।

विधि व प्रसाद

लक्ष्मी-कुबेर पूजा, कीमती धातु खरीदना, और द्वार पर यमदीप जलाना।

मुख्य तथ्य

धनतेरस भगवान धन्वंतरि का जन्मदिन भी माना जाता है।
Regional tradition
धनतेरस भगवान धन्वंतरि का जन्मदिन भी माना जाता है।
Regional tradition