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गणेश चतुर्थी

भगवान गणेश का जन्म — मिट्टी की मूर्तियों, पूजा और विसर्जन से मनाया जाता है।

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गणेश चतुर्थी भगवान गणेश के जन्म का उत्सव है, जो विघ्नहर्ता, बुद्धि और शुभ आरंभ के देवता हैं। इसमें उनकी मूर्ति की स्थापना और पूजा की जाती है।

त्योहार की कथाएँ

इसकी उत्पत्ति शिव पुराण की गणेश-रचना कथा से जुड़ी है। इसका आधुनिक सार्वजनिक उत्सव भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा है और महाराष्ट्र में लोकप्रिय हुआ।

शिव पुराण के अनुसार, माता पार्वती ने अपनी रक्षा के लिए चंदन के लेप से गणेश को बनाया। जब शिव लौटे और बालक ने उन्हें रोका, शिव ने सिर काट दिया। पार्वती को सांत्वना देने के लिए शिव ने हाथी का सिर लगाकर उसे जीवन दिया और गणेश को अपना पुत्र बनाया।
Shiva Purana; regional tradition

क्यों मनाते हैं

गणेश चतुर्थी भगवान गणेश के जन्म का उत्सव है, जो विघ्नहर्ता, बुद्धि और शुभ आरंभ के देवता हैं। इसमें उनकी मूर्ति की स्थापना और पूजा की जाती है।
Shiva Purana; regional tradition

कब

यह भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को पड़ता है (अगस्त–सितंबर), और कई क्षेत्रों में 10 दिन तक मनाया जाता है।

कौन मनाता है

पूरे भारत और दुनिया भर के हिंदुओं द्वारा मनाया जाता है; सबसे धूमधाम से महाराष्ट्र में, जहाँ बड़ी सार्वजनिक मूर्तियाँ स्थापित कर विसर्जित की जाती हैं।

उत्पत्ति

इसकी उत्पत्ति शिव पुराण की गणेश-रचना कथा से जुड़ी है। इसका आधुनिक सार्वजनिक उत्सव भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा है और महाराष्ट्र में लोकप्रिय हुआ।
Shiva Purana; regional tradition

पूजनीय देवता

भगवान गणेश।

कैसे मनाएँ

गणेश मूर्ति स्थापित करें, प्राणप्रतिष्ठा करें, मोदक, फूल और दूर्वा अर्पित करें, गणेश मंत्र जपें, और अंतिम दिन मूर्ति का विसर्जन करें।

विधि व प्रसाद

मोदक (गणेश का प्रिय व्यंजन), दूर्वा, दोपहर में चतुर्थी पूजा, और अनंत चतुर्दशी पर विसर्जन।

मुख्य तथ्य

अधिकांश हिंदू अनुष्ठानों में भगवान गणेश का सबसे पहले आवाहन किया जाता है। यह त्योहार क्षेत्र के अनुसार 1 से 10 दिन तक मनाया जाता है।
Shiva Purana; regional tradition