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त्योहार प्रोफ़ाइल

Ganga Dussehra

गंगा के पृथ्वी पर अवतरण का उत्सव — स्नान और पूजा के साथ।

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गंगा दशहरा देवलोक से पृथ्वी पर गंगा नदी के अवतरण का उत्सव है, पवित्र स्नान और प्रार्थना का दिन।

त्योहार की कथाएँ

गंगा का अवतरण

त्रेता युग
राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों के शाप से मुक्ति हेतु गंगा के अवतरण की प्रार्थना की। महान नदी अवतरित हुई, और भगवान शिव ने उसे अपनी जटाओं में धारण कर धीरे से पृथ्वी पर बहाया, जो जिसे भी छूती, पवित्र करती।
Bhagiratha legend

क्यों मनाते हैं

गंगा दशहरा देवलोक से पृथ्वी पर गंगा नदी के अवतरण का उत्सव है, पवित्र स्नान और प्रार्थना का दिन।
भगीरथ कथा (गंगा अवतरण)

कब

गंगा दशहरा ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी को पड़ता है (मई-जून)।

कब से मनाया जाता है

गंगा अवतरण कथा प्राचीन है, और गंगा दशहरा सदियों से मनाया जाता है।
पौराणिक परंपरा

कौन मनाता है

हिंदु, विशेषकर हरिद्वार, वाराणसी और प्रयाग में गंगा तट पर इसे मनाते हैं।

उत्पत्ति

इसकी उत्पत्ति गंगा के अवतरण से है, जिसे राजा भगीरथ की प्रार्थना से पृथ्वी पर लाया गया ताकि उनके पूर्वज मुक्त हों।
भागवत पुराण; भगीरथ कथा

पूजनीय देवता

नदी देवी गंगा, और भगवान शिव जिन्होंने अवतरित गंगा को धारण किया।

कैसे मनाएँ

गंगा में पवित्र स्नान करें, प्रार्थना व दीप अर्पित करें, और कुछ क्षेत्रों में उनके अवतरण के दस दिनों के प्रतीक दस कंकड़ डुबोएँ।

विधि व प्रसाद

पवित्र स्नान, गंगा आरती, और दीप व प्रार्थना अर्पण।

मुख्य तथ्य

गंगा दशहरा दस प्रकार के पापों को दूर करने वाला माना जाता है।
Regional tradition