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Gauri Teej

माँ गौरी (पार्वती) की पूजा — कुंवारी कन्याएँ और विवाहित स्त्रियाँ करती हैं।

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गौरी तीज अविवाहित कन्याओं और विवाहित स्त्रियों द्वारा माँ गौरी (पार्वती) की पूजा है, सुखी विवाह और वैवाहिक सुख के लिए।

क्यों मनाते हैं

गौरी तीज अविवाहित कन्याओं और विवाहित स्त्रियों द्वारा माँ गौरी (पार्वती) की पूजा है, सुखी विवाह और वैवाहिक सुख के लिए।
राजस्थान क्षेत्रीय परंपरा

कब

गौरी तीज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया को पड़ती है (अगस्त-सितंबर), कुछ क्षेत्रों में चतुर्थी को।

कब से मनाया जाता है

गौरी पूजा प्राचीन है, पार्वती परंपरा से जुड़ी।
क्षेत्रीय परंपरा

कौन मनाता है

महिलाएँ, विशेषकर राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में इसे मनाती हैं।

उत्पत्ति

इसकी उत्पत्ति गौरी (पार्वती) की पूजा से है, जो अच्छा वर और वैवाहिक सुख देने वाली मानी जाती हैं।
पार्वती पूजा परंपरा

पूजनीय देवता

देवी गौरी (पार्वती)।

कैसे मनाएँ

महिलाएँ श्रेष्ठ वस्त्र पहनती हैं, गौरी प्रतिमा की पूजा करती हैं, और कुछ क्षेत्रों में गुड़ियों व शोभायात्राओं के साथ गणगौर मनाती हैं।

विधि व प्रसाद

गौरी पूजा, प्रतिमा का श्रृंगार, और कुछ क्षेत्रों में गणगौर उत्सव।

मुख्य तथ्य

गौरी तीज राजस्थान के गणगौर त्योहार से संबंधित है।
Regional tradition