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Gita Jayanti

भगवद्गीता के उपदेशों का उत्सव — भगवान कृष्ण द्वारा कहा गया ज्ञान।

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गीता जयंती उस दिन का उत्सव है जब भगवान कृष्ण ने कुरुक्षेत्र के युद्धभूमि में अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया।

त्योहार की कथाएँ

दिव्य गीत

द्वापर युग
महाभारत युद्ध से पहले अर्जुन शोक से व्याकुल थे। तब भगवान कृष्ण ने भगवद्गीता का उपदेश देकर उन्हें कर्तव्य, भक्ति और निष्काम कर्म का मार्ग बताया। यही उपदेश गीता का सार है।
Bhagavad Gita (Mahabharata)

क्यों मनाते हैं

गीता जयंती उस दिन का उत्सव है जब भगवान कृष्ण ने कुरुक्षेत्र के युद्धभूमि में अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया।
भगवद्गीता (महाभारत)

कब

गीता जयंती मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी को पड़ती है (नवंबर-दिसंबर)।

कब से मनाया जाता है

गीता का उपदेश द्वापर युग का माना जाता है; इसे स्मरण करने वाला त्योहार सदियों से मनाया जाता है।
भगवद्गीता परंपरा

कौन मनाता है

दुनिया भर के हिंदु इसे मनाते हैं, विशेषकर कुरुक्षेत्र में।

उत्पत्ति

इसकी उत्पत्ति महाभारत युद्ध से पहले कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए गीता उपदेश से है, जो द्वापर युग में माना जाता है।
भगवद्गीता (द्वापर युग)

पूजनीय देवता

भगवान कृष्ण।

कैसे मनाएँ

भगवद्गीता का पाठ या श्रवण करें, गीता पूजा करें, और धर्म व कर्तव्य की शिक्षाओं का चिंतन करें।

विधि व प्रसाद

गीता पाठ, पूजा, प्रवचन, और पवित्र ग्रंथ के रूप में गीता का पठन।

मुख्य तथ्य

भगवद्गीता में 18 अध्यायों में 700 श्लोक हैं।
Bhagavad Gita