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त्योहार प्रोफ़ाइल

गुड़ी पड़वा

मराठी नव वर्ष — गुड़ी ध्वज फहराकर शुभकामनाओं के साथ मनाया जाता है।

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गुड़ी पड़वा मराठी नव वर्ष है, जिसमें विजय, समृद्धि और शुभता के प्रतीक के रूप में गुड़ी (चमकीला ध्वज) फहराई जाती है।

त्योहार की कथाएँ

विजय ध्वज

गुड़ी विजय और समृद्धि का प्रतीक है। माना जाता है कि यह राम के अयोध्या विजयी वापसी और मराठा इतिहास में छत्रपति शिवाजी महाराज की विजयों की स्मृति दिलाती है।
Maratha regional tradition

क्यों मनाते हैं

गुड़ी पड़वा मराठी नव वर्ष है, जिसमें विजय, समृद्धि और शुभता के प्रतीक के रूप में गुड़ी (चमकीला ध्वज) फहराई जाती है।
महाराष्ट्रीय चंद्र-सौर परंपरा

कब

गुड़ी पड़वा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को पड़ती है (मार्च-अप्रैल), मराठी नव वर्ष।

कब से मनाया जाता है

गुड़ी पड़वा सदियों से मराठी नव वर्ष रही है, चंद्र-सौर कैलेंडर से जुड़ी।
महाराष्ट्र क्षेत्रीय परंपरा

कौन मनाता है

भारत और दुनिया भर के महाराष्ट्रीय समुदाय इसे मनाते हैं।

उत्पत्ति

इसकी उत्पत्ति नए चंद्र-सौर वर्ष से है, और गुड़ी मराठों की विजय व रामायण में राम की विजय की स्मृति दिलाती है।
मराठा विजय परंपरा; चंद्र-सौर नव वर्ष

पूजनीय देवता

भगवान ब्रह्मा और भगवान राम (विजय), और कुछ परंपराओं में देवी गौरी।

कैसे मनाएँ

गुड़ी फहराएँ (बाँस की छड़ पर चमकीला वस्त्र, गेंदा व नीम की पत्तियों से युक्त), तेल स्नान करें, और नव वर्ष पूजा करें।

विधि व प्रसाद

गुड़ी फहराना, तेल स्नान, पंचांग पठन, और श्रीखंड व पूरन पोली जैसे व्यंजन।

मुख्य तथ्य

गुड़ी पड़वा दक्षिण भारत की उगादि के ही दिन पड़ती है।
Regional tradition